Tuesday, November 22, 2016

किस नाम से पुकारू मैं तुम्हें माँ



कोई कहता है तुझे माँ शैलपुत्री,किसी ने कहा हो तुम बह्माचारिणी, कहा चंद्रघंटा भी ,
कोई पुकारे तुझे कूष्माण्डा, तो कोई स्कंदमाता,
प्यार से बुलाते है तुझे कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, माँ सिद्धिदात्री,

किस नाम से पुकारू मैं तुम्हें माँ, मेरी माँ!!

आती हो नवरात्रों में तुम, करती हो पूरी सबकी मुँह मांगी मुरादें,
रहती हो  तुम मेरे दिल में हमेशा, करती हो सबके दुखों का हरण,
किस नाम से पुकारू मैं तुम्हें माँ, मेरी माँ!!

बनकर आती हो सुहागन का श्रृंगार, भर देती हो उसकी झोली खुशियों से,
कर जाती हो रंगो की फुहार, पा लेते ऋद्धि-सिद्धि तुझ से,
किस नाम से पुकारू मैं तुम्हें माँ, मेरी माँ!!

कर देती हो उजाला घरों में, नहीं रहता कोई तेरा भक्त भूखा,
आती हो सिंह की सवारी बनकर, ले जाती सारे कष्टों को दूर,
किस नाम से पुकारू मैं तुम्हें माँ, मेरी माँ!!

तेरा आंचल भरा है ममता से, तेरी कोख में मिलता है सुकुन,
खुद सोती है कांटों की सेज़ पर,
सुलाती है हमें फूलों की सेज़ पर,
किस नाम से पुकारू मैं तुम्हें माँ, मेरी माँ!!

मेरी एक आवाज़ पर दौड़ी आती है तू माँ, रक्षा करती है मेरी तू उन रावणों से,
रक्षा करतीआई है तू हर युग में मेरी,
कभी आई सीता बनकर, तो कभी दुर्गा, तो कभी आई काली माँ बनकर,
किस नाम से पुकारू मैं तुम्हें माँ, मेरी माँ!!
दुर्गा माँ!! तू तो है,मेरी माँ!!!

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