Wednesday, June 18, 2025

अधूरी उड़ान

 


                                                                        

सकारात्मकता सोच के साथ,
सपनों को समेट कर,
बैठे थे वो विमान में,
10
घंटे बाद जिनकी हो जानी थी मंज़िल तय.......

उन्हें नहीं था एहसास,
इस उड़ान से सपनों के पंख बादलों में खो जाएँगे,
क्या कभी सोचा था उन्होंने,
कि यह उड़ान, एक अंतिम सफ़र बन जाएगा,
मंज़िल नहीं, राख बन जाएगी,
वो जो थे ज़िंदगी के मुसाफ़िर,
अब बस खबरों की सुर्खियाँ बनकर रह गए...

खिड़की से झांकती वह माँ, गले मिलता वह बेटा,
अपने पिता के सपना को लेकर जाती वह बिटिया,
अपने हमसफर से मिलने की तमन्ना लिये जाती  नवविवाहिता,
किसी के हाथ में था खिलौना, तो किसी के हाथ में आटे के लड्डू,
किसी के हाथों में लगी मेहंदी,
किसी का वो आखिरी खत जो अब बेमंज़िल रह गया,
सभी एक नई शुरुआत की उम्मीद लिए……

विमान ने अपनी उड़ान भरी........
कुछ पल में ही पायलट हो गया मजबूर,
MAY DAY
की गूँज
एक तेज चीख,
एक सन्नाटा,
एक पल में रुक गया वक़्तजैसे साँस थम गई हो…...

अब नहीं रहे वो लड्डू बनाने वाले कोमल हाथ,
न माँ का आंचल, न पिता का साया साथ,
निस्वार्थ सेवा कर लौटे थे जो थके पाँव,
उन्हीं मासूमों को नसीब न हुई एक रोटी का कौड़,

न पूरे होंगे अब अपनों के अधूरे ख्वाब,
सिर्फ़ मलबा बचा है , जिसमें आज भी परिजन ढूंढ रहे अपनों को,
DNA रिपोर्ट आ गई,
पर वो आँखें अब भी तरस रही हैं,
एक आख़िरी बार देखने को उन्हें…


ज़िंदा हैं हम, पर पूरी तरह नहीं,
क्या हर खबर अब दिल दहला देगी ?
क्या अब विमानकर्मी जायेंगे अपने अगले सफर पर ?
क्या
रुक गई सबकी ज़िंदगी इस हादसे से,
क्या अब उस उड़ान का ज़िक्र भी कांपती आवाज़ से होगा?

 
कुछ मुसाफ़िर कभी लौट कर नहीं आते

केवल उनकी यादें रहती हैं,
गूंजती है उनकी दुआएं हवा में ,
मानों बादलों की घटा भी कह रही,
अब ज़रूरत है,

हर राख से उठने की, हर शून्य आकाश में आशा खोजने की।।

 

सुनीता महेन्द्रू

14-06-25

A tribute to all the souls we lost, and the dreams that still fly among the clouds...

Wednesday, April 17, 2024

कभी-कभी दिल में ख़याल आता है……..




कभी-कभी दिल में ख़याल आता है……..


कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए...... 

कि तुझको बनाया गया है हमारे लिए.,

तारों से झिलमिलाता गगन, चाँद भी अपने शीतल प्रकाश से मिटा ना सका अंधकार को,

तुम ही बने हो निशा के अंधकार के मिटाने के लिये,

तुम ही तो लाए उम्मीद की किरणें…….


कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......

पहाड़ी पर जमें कोहरे ने सितारों में भी मचा दी हलचल, अब से पहले सितारों देखी थी ऐसी खलबली

तुझे नभ पे बुलाया गया , देख तुझे पंछी भी लगे गुनगुनाने,

मोरों का नव नृत्य, हृदय को अतिशय भाया 

उड़ूँ मस्त गगन मैं,आजाद हूँ दुनिया के चमन में…..


कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......

कि जैसे शहनाइयाँ की गूॕज से लगा बादल भी झूमने,

घूँघट उठा चाँदनी रात का तेरे आने से

हल्की लालिमा से धरती भी जगमगा उठी,

कलियां भी मुसकराए,महक उठी बागिया….


कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......

कि जैसे तुम ही तो हो धरा का सौन्दर्य, तुम बिन खेत-खलिहान है सूने,

तुम ही भंवरो का कल, तुम ही हो इन्द्रधनुष के सप्तरंगो का श्रृगार,

उम्मीद हो बहतीं धारा की, सागर की लहरो की……


कभी-कभी दिल में ख़याल आता है,कि जैसे सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए......

जैसे तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......

अंहकारी हिरण्यकश्यप भी ना देख सका उगते सूरज को, उठ मत बन अंहकारी, 

नहीं तो सिमट जाएगा घोर अंधेरा में,बोल उठा उगता सूरज आज,


कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए......

तेरे आने से चमका सवेरा…..

दूर हुआ मन का अंधकार…..

अब ना ओड़ूँगी गम का आॕचल….

अब ना जोड़ूँगी रिश्ता तन्हाइयों से…..

बस पंछी बनूँ उड़ती मस्त गगन मैं…

कभी-कभी दिल में ख़याल आता है……