Thursday, December 15, 2016

अटूट रिश्ता

जन्म लेते ही जुड़ जाते है सब रिश्तों के अनमोल धागों में,
बनते है रिश्ते माँ- बाप, भाई-बहनों  और दोस्तों से,
कुदरत ने बनाया एक ऐसा अटूट पवित्र  रिश्ता ,
नाम दिया जिसे पति-पत्नी का l

अंजान होकर भी  दोनों एक-दूसरे  से,
वादा करते है जन्मों तक साथ निभाने का,
कुदरत ने ही तो बनाया इस अटूट पवित्र  रिश्ते  को ,
नाम दिया जिसे पति-पत्नी का l

नोंक-झोंक  होना,  जिद करना,   झगड़ा और अहम  तो है यह मामूली शब्द इस रिश्ते में,
परिपक्व होता जाता है यह रिश्ता समय के साथ- साथ,
बीतते समय के साथ एकजीवता, तृप्तता धीरे-धीरे आ जाती है रिश्तों में ,
कुदरत ने ही तो बनाया इस अटूट पवित्र  रिश्ते  को ,
नाम दिया जिसे पति-पत्नी का l

उम्र के साथ दोनों एक-दूसरे पर हो जाते है आश्रित,
खुद के अस्तित्व को भूलाकर जीते है एक-दूसरे के लिए,
कुदरत ने ही तो बनाया इस अटूट पवित्र  रिश्ते  को ,
नाम दिया जिसे पति-पत्नी का l

अपनों को खोने का डर, अपनों के बीच किसी के आने का डर,
अपनों  के बीच आ रही कड़वाहट का डर,
पर विष को अमृत में बदल देता यह रिश्ता ,वक्त के साथ बढ़ता है रुझान एक-दूसरे के लिए,

कुदरत ने ही तो बनाया इस अटूट  रिश्ते  को  l



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