बनते है रिश्ते
माँ- बाप, भाई-बहनों और दोस्तों से,
कुदरत ने बनाया
एक ऐसा अटूट पवित्र रिश्ता ,
नाम दिया जिसे
पति-पत्नी का l
अंजान होकर भी दोनों
एक-दूसरे से,
वादा करते है
जन्मों तक साथ निभाने का,
कुदरत ने ही तो
बनाया इस अटूट पवित्र रिश्ते को ,
नाम दिया जिसे
पति-पत्नी का l
नोंक-झोंक होना,
जिद करना, झगड़ा और अहम तो है यह मामूली शब्द इस रिश्ते में,
परिपक्व होता
जाता है यह रिश्ता समय के साथ- साथ,
बीतते समय के
साथ एकजीवता, तृप्तता धीरे-धीरे आ जाती है रिश्तों में ,
कुदरत ने ही तो
बनाया इस अटूट पवित्र रिश्ते को ,
नाम दिया जिसे
पति-पत्नी का l
उम्र के साथ
दोनों एक-दूसरे
पर हो जाते है आश्रित,
खुद के
अस्तित्व को भूलाकर जीते है एक-दूसरे के लिए,
कुदरत ने ही तो
बनाया इस अटूट पवित्र रिश्ते को ,
नाम दिया जिसे
पति-पत्नी का l
अपनों को खोने
का डर, अपनों के बीच
किसी के आने का डर,
अपनों के बीच आ रही कड़वाहट का डर,
पर विष को अमृत
में बदल देता यह रिश्ता ,वक्त के साथ बढ़ता है रुझान एक-दूसरे के लिए,
कुदरत ने ही तो
बनाया इस अटूट रिश्ते को l

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