कभी-कभी दिल में ख़याल आता है……..
कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए......
कि तुझको बनाया गया है हमारे लिए.,
तारों से झिलमिलाता गगन, चाँद भी अपने शीतल प्रकाश से मिटा ना सका अंधकार को,
तुम ही बने हो निशा के अंधकार के मिटाने के लिये,
तुम ही तो लाए उम्मीद की किरणें…….
कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......
पहाड़ी पर जमें कोहरे ने सितारों में भी मचा दी हलचल, अब से पहले सितारों न देखी थी ऐसी खलबली
तुझे नभ पे बुलाया गया , देख तुझे पंछी भी लगे गुनगुनाने,
मोरों का नव नृत्य, हृदय को अतिशय भाया
उड़ूँ मस्त गगन मैं,आजाद हूँ दुनिया के चमन में…..
कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......
कि जैसे शहनाइयाँ की गूॕज से लगा बादल भी झूमने,
घूँघट उठा चाँदनी रात का तेरे आने से,
हल्की लालिमा से धरती भी जगमगा उठी,
कलियां भी मुसकराए,महक उठी बागिया….
कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......
कि जैसे तुम ही तो हो धरा का सौन्दर्य, तुम बिन खेत-खलिहान है सूने,
तुम ही भंवरो का कल, तुम ही हो इन्द्रधनुष के सप्तरंगो का श्रृगार,
उम्मीद हो बहतीं धारा की, सागर की लहरो की……
कभी-कभी दिल में ख़याल आता है,कि जैसे सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए......
जैसे तुझको बनाया गया है हमारे लिए.......
अंहकारी हिरण्यकश्यप भी ना देख सका उगते सूरज को, उठ मत बन अंहकारी,
नहीं तो सिमट जाएगा घोर अंधेरा में,बोल उठा उगता सूरज आज,
कभी-कभी दिल में ख़याल आता है, सूरज तुझको बनाया गया है हमारे लिए......
तेरे आने से चमका सवेरा…..
दूर हुआ मन का अंधकार…..
अब ना ओड़ूँगी गम का आॕचल….
अब ना जोड़ूँगी रिश्ता तन्हाइयों से…..
बस पंछी बनूँ उड़ती मस्त गगन मैं…
कभी-कभी दिल में ख़याल आता है……
