अपने काव्य संग्रह 'मेरे दिल से' में मैने अपनी आवाज़ जन-जन तक पहुँचाने की कोशिश की है। इस साहित्यिक परियोजना में मैं बताना चाहती है कि शब्द किसी के मोहताज नही है, वे आपकी पहचान
है । मैं कविता लिखते समय बहुत भावुक हो जाती हूँ और हूँ मेरा मानना है कि शब्दों को भावनाओं को साथ रखा जाये तो हम अपनी बात आसानी से कह सकते है।कविता किसी की मोहताज़ नहीं होती है, उनका संबंध हमारी सोच पर निर्भर है ।