Sunday, October 16, 2022

'माँ शारदा'




ए चाँद! पूजे तुझे करवा चौथ पर हर सुहागन,

करे तुझसे अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना….


सजी रही उसके माथे की बिंदिया,

चूड़ियों की खनखन से महकती रहे उसकी बगिया,

पायल की झंकार से झूम उठे उसका पिया….


ए चाँद! यही तो माँगे हर सुहागन तुझसे,

माँगे आज यह सुहागन अपनी माँ के लिए दुआएँ  तुझसे….


जन्म-मृत्यु तो है जीवन का चक्र, पर जानकर अंजान है हम,

जीवन के चक्रव्युह में उलझे रहते है हम,

मोह माया ने जकड़ लिया हमें…..


चाँद ! जन्म क्या है? पंचतत्व ( मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु और शून्य) से निर्मित देह,

आत्मा( अनंत्) ही जोड़कर रखती देह को,

ईश्वर ने जन्म देने के लिये सृष्टि में भेजा माँ को….


मृत्यु क्या है? किसी भी जीवात्मा के जीवन के अन्त को कहते मृत्यु,

अपनों को खोने का डर, काँप उठती रूह सुनकर नाम मृत्यु….


ए चाँद! बेटी हूँ उस 'शारदा माँ ' की जिसने नहीं होने दिया अपने देह को पंचत्तव में विलीन,

मोक्ष की प्राप्ति के लिए, मिट्टी में मिलने से तो अच्छा है, ‘देहदान’ करना,

ऐसी सोच रखने वाली जननी को शत शत नमन…..


माँ के इस ख्वाब को पूरा किया,उनके पिया ने,

साथ दिया मेरे पापा का,मेरे भाई-भाभी ने,

गर्व महसूस कर रहे पोता-पोती,अपने दादा पर…..


ए चाँद! शीश झुकाते है उस जननी के आगे,

जन्म दिया जिसने तुझे,

शीश झुकाती हूॕ अपने दादा  के आगे,

जिन्होंने कहा हमेशा बेटा तुझे,

गर्व महसूस कर रहे,बुआ-ताऊ तुझ पर माँ…..


बेटी हूँ आपकी, लूँ आपकी कोख से हमेशा जन्म 

पापा आप है अपने बेटे-बहू,बेटी-दामाद की ताकत…


ए चाँद! आई तेरी शरण में मेरी 'शारदा माँ' तेरी बगिया महकने,

आई तेरे पास एक पुण्य आत्मा करा देहदान उसने,

अपनी प्यारी बहना को बिठाना पलकों पर,

त्याग की मूरत,संस्कारों की देवी,

नांगिया परिवार की बहू रानी ''शारदा माँ' को भावपूर्ण श्रद्धांजलि…



Wednesday, June 29, 2022

उफ!! ये परीक्षाएँ.....



पहुँची जब परीक्षा भवन , साक्षात् दर्शन  हुए यमदूत के,

देखा यमदूत के हाथों में भारी भरकम बंडल,

हाथों में दर्द , चाल थी उनकी धीमी,

 उफ!! ये परीक्षाएँ

 

टीचर जी कोरोना अंकल से सीखो,

अब है सोशल मीडिया का ज़माना,

व्हाट्सअप ,फेसबुक से सीखे फ्यूचर ब्राइट करने के नुस्खे,

ऑनलाइन परीक्षा लो,सुनहरा भविष्य बनाओ सबका..


यह क्या मास्टर जी,इतिहास का पर्चा, अरे! आज तो गणित की परीक्षा,

है……थी….. चल  छोड़ ना,

सौ नंबर का पर्चा देख छा गया अंधकार, खुजाने लगी अपने सिर को,

गोलमाल है भाई …….सब गोलमाल है……..

 

देख मुझे प्रश्न पत्र भी मुस्काराए....hey papu what's up

अरे!!अठारह सौ सत्तावन में किसके बीच युद्ध हुआ, क्या करना है मुझे इससे,

पूछ लेते…..कौन थी रानी पद्मावती? फौरन लिख देता दीपिका पादुकोण……..


कौन है,कांग्रेस अध्यक्ष........... बूझो तो जाने ,टीचर जी my.mom……who else,

सवाल पर सवाल.... आने दो  मुझे सत्ता में ,

बस और सवाल नहीं , 56 इंच के सीने वाले से कर दूँगा शिकायत....


अजब-गजब की है ये परीक्षाएँ,

कहते हैं, भूतकाल को वर्तमान काल में बदलो!!

भूतकाल वाली गुनगुना रही ‘ तू दिया, मैं बाती’.....

वर्तमान में कही बोल दिया मैं हूँ डॉन......

आंखें मूंद कर याद करने लगा संकट मोचन हनुमान को,

 

3 घंटे की कैद, छींक को भी है ‘नो एंट्री’ जनाब,

माना आ- जा नहीं सकते कही, चलो जुल्फों से ही खेल ले,

बना मेज को तबला गाना ही गुनगुना ले …..हो उड़े जब जब जुल्फें तेरी

कावरियों का दिल मचले……..


ध्यान भटका जरा-सा टीचर जी का,

खेल लिये गुली डंडा, काफी थी पेंसिल-रबड़ उसके लिए,

नहीं कर सकते बातें पड़ोसन से, पर ऑंख- मिचौली  तो खेल सकते उससे……..

 

रात-भर सोने नहीं दिया फेसबुक नोटीफिटेशन ने,

मौका भी है दस्तूर भी, पूरी कर ले तू अपनी नींद

गीता बोली..... कर्म कर, फल की इच्छा मत रख तू……..

 

उफ़! ये परीक्षाएँ किसने बनाई,

दरख्वासत है आम आदमी पार्टी से, लाए बच्चों के लाए मुफ्त अंक पॉलिसी,

जय हो झाड़ू बाबा की…….

 

खुली नींद सामने खड़ी टीचर जी गुनगुना रही थी,

पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा बेटा हमारा ऐसा काम करेगा,

मगर ये तो, कोई ना जाने के तेरी मंज़िल, है कहाँ,

सोच विचार किया, है अच्छी ईमेज है अपनी

थाम कलम हाथों में, चला दे जादू पेपर पर…….. उफ!! ये परीक्षाएँ

 

Saturday, January 15, 2022

नव भारत का निर्माण…


गुंजता हमेशा जहाँ वेदों के मंत्रों से देश हमारा ,

वही आज सुनाई दे रही अराजकता की गूंज,

ऋषि- मुनियों का है देश हमारा,

पर आज उठ रहे है उसकी गरिमा पर सवाल, 

दिखा तू अपनी अमिट पहचान, ले संकल्प नहीं लगने देंगे दाग संतों की भूमि पर,

करेंगे नव भारत का निर्माण…..


अंग्रेजों की 'फूट डालो राज करो' की नीति ने,

बनाया उसने सोने की चिड़िया को अपना गुलाम,

क्या भूल गये तुम उन ज़ख्मों को, 

फिर भी बेच रहे देश अपना भष्ट्राचारियों के हाथों में,

दिखा तू अपनी अमिट पहचान, ले संकल्प सही उम्मीदवार  चुनकर रोकेंगे भष्ट्राचार, 

करेंगे नव भारत का निर्माण…..


संस्कृतियों से समृद्ध  देश भारत हमारा,

रहते मिलकर  विभिन्न धर्मों -जाति के लोग यहाँ, 

भूल रहा है तू अपनी गौरवशाली परंपरा व संस्कृति को, 

दिखा तू अपनी अमिट पहचान, ले संकल्प फिर बनाएंगे भाईचारे का मंदिर, 

करेंगे नव भारत का निर्माण…..


जग की जननी कहते बेटी को,

कोई कहता दुर्गा कोई कहता काली, कोई कहे लक्ष्मी,

बेटियाँ है धरोहर समाज और परिवार  की,

फिर क्यों बेटियाँ हो रही ज़लील,

दिखा तू अपनी अमिट पहचान, ले संकल्प करेंगे बेटियों का सम्मान, करेंगे उनको शिक्षित,

करेंगे नव भारत का निर्माण…


खुशकिस्मत है हम, जन्म लिया वीरों की भूमि पर,

देश की सुरक्षा के खातिर जुटे रहते वीर सियाचिन बॉर्डर पर

लगा देते जान की बाजी,

पर सियासी गलियारों में फौज खड़ी फरेबियों की,

जब भी आतंकी  मारता होती पीर बड़ी,

शहादत होती वीर की तो बनाते उसका राजनीति का मुद्दा,

दिखा तू अपनी अमिट पहचान, ले संकल्प करेंगे वतन से मोहब्बत, मरेंगे वतन के खातिर,

करेंगे नव भारत का निर्माण…..


गर्म है चुनावी माहौल आजकल , वादों का दौर भी तेज हुआ 

राजनीति भी कितनी रंगीन ,विपक्ष  बन जाता दोस्त , 

पिता बन जाता दुश्मन,

महजबों के नाम लड़ाते हमें, पैसो के बल पर खरीदते गद्दी,

दिखा तू अपनी अमिट पहचान, ले संकल्प 

खेलने नहीं देंगे किसी को भारत के संविधान से, जहर उगलने वाले का करेंगे बाहिष्कार

करेंगे नव भारत का निर्माण…..


हिंदी है समृद्धि वैभव सहजता का भंडार,

हमारी आत्मा और भावना का श्रृंगार,

वाणी के सुरॊं की मधुर झंकार,

राष्ट्र की सूत्रधार, फिर क्यों आती हमें शर्म बोलने में,

दिखा तू अपनी अमिट पहचान, ले संकल्प विकसित कर हिंदी भाषा को, 

भारत की शान बढ़ाएंगे, हिंदी भाषी कहलायेंगे

करेंगे नव भारत का निर्माण….

संदेश पूरे जग में फैलाएंगे…….


Sunday, January 2, 2022

नमन करती हूँ जननी तुझे .......



6वीं ई.पू 25 दिसंबर का दिन, जन्म हुआ गरीबों के मसीहा यीशु का,
युग- युगांतर बीते ,कितने ही मानवीय अवतारों ने लिया जन्म,
25 दिसंबर 1924 का दिन, जन्म  हुआ एक और मसीहा अटल को......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका सच्चा सपूत,
जिसने  भारत को जमीन का टुकड़ा नहीं कहा, कही वीरों की भूमि,
जियेंगे तो इसके लिये ,मरेंगे तो इसके लिये......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका राष्ट्र पुरुष ,
जिसने दुश्मनों को दी चुनौती ....दबे पाँव, चोरी-छिपे से न करना वार ,
सामने से वार करना, फिर हमें आज़मा.......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका मार्गदर्शक,
सपनो को साकार करने की क्षमता रखता यह लाल,
आसान न था परमाणु परीक्षण, विपक्षियों ने साधा निशाना आप की काबिलियत पर,
हार नही मानूँगा.रार नहीं ठानूँगा……दुनिया को दिया संदेश……

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका यह लाल,
थे जिसके पावों के नीचे अंगारे,उजियारे में था अंधकार,
पर परिस्थितियों से लड़े,  स्वप्न टूटे पर पहचान बनाई अपनी......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका यह राजनेता,
उठाए कदम विश्व से आतंकवाद मिटाने हेतु, किया प्रयास  सभी पड़ोसी से  संबंध सुधारने का,
कहा कदम मिलाकर चलना होगा  हमें……….

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका तेजस्वी पुत्र,
धैर्य ,सहनशीलता झलकती उनमें, लोकतंत्र के राजा कहते उन्हें,
पराक्रम की अद्भूत कला से भरपूर ,
भारत माँ की हमेशा लाज रखी आपने….

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका कविराज,
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अटल जी,बातें और विचार होते सदा तर्कपूर्ण आपके,
विपक्ष भी कुछ नहीं बोल पाता संसद में.  ऐसी  थी तर्कपूर्ण वाणी आपकी,
कविताओं में ढाल लेते सम्पूर्ण जग को ,करते सामाजिक बुराइयों पर प्रहार आप,

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका प्रताप,
भारतरत्न से सम्मानित अटल जी, सही मायने में भारत माँ के सच्चे सपूत है आप,
संपूर्ण व्यक्तित्व शिखर पुरुष के रूप में रहा दर्जा  आपका,
खास जगह बनाई लोगों के दिलों में, कहते हैं जनता के प्रधानमंत्री आपको.....

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को यह मसीहा.....