Sunday, January 2, 2022

नमन करती हूँ जननी तुझे .......



6वीं ई.पू 25 दिसंबर का दिन, जन्म हुआ गरीबों के मसीहा यीशु का,
युग- युगांतर बीते ,कितने ही मानवीय अवतारों ने लिया जन्म,
25 दिसंबर 1924 का दिन, जन्म  हुआ एक और मसीहा अटल को......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका सच्चा सपूत,
जिसने  भारत को जमीन का टुकड़ा नहीं कहा, कही वीरों की भूमि,
जियेंगे तो इसके लिये ,मरेंगे तो इसके लिये......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका राष्ट्र पुरुष ,
जिसने दुश्मनों को दी चुनौती ....दबे पाँव, चोरी-छिपे से न करना वार ,
सामने से वार करना, फिर हमें आज़मा.......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका मार्गदर्शक,
सपनो को साकार करने की क्षमता रखता यह लाल,
आसान न था परमाणु परीक्षण, विपक्षियों ने साधा निशाना आप की काबिलियत पर,
हार नही मानूँगा.रार नहीं ठानूँगा……दुनिया को दिया संदेश……

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका यह लाल,
थे जिसके पावों के नीचे अंगारे,उजियारे में था अंधकार,
पर परिस्थितियों से लड़े,  स्वप्न टूटे पर पहचान बनाई अपनी......

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका यह राजनेता,
उठाए कदम विश्व से आतंकवाद मिटाने हेतु, किया प्रयास  सभी पड़ोसी से  संबंध सुधारने का,
कहा कदम मिलाकर चलना होगा  हमें……….

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका तेजस्वी पुत्र,
धैर्य ,सहनशीलता झलकती उनमें, लोकतंत्र के राजा कहते उन्हें,
पराक्रम की अद्भूत कला से भरपूर ,
भारत माँ की हमेशा लाज रखी आपने….

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका कविराज,
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अटल जी,बातें और विचार होते सदा तर्कपूर्ण आपके,
विपक्ष भी कुछ नहीं बोल पाता संसद में.  ऐसी  थी तर्कपूर्ण वाणी आपकी,
कविताओं में ढाल लेते सम्पूर्ण जग को ,करते सामाजिक बुराइयों पर प्रहार आप,

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को उसका प्रताप,
भारतरत्न से सम्मानित अटल जी, सही मायने में भारत माँ के सच्चे सपूत है आप,
संपूर्ण व्यक्तित्व शिखर पुरुष के रूप में रहा दर्जा  आपका,
खास जगह बनाई लोगों के दिलों में, कहते हैं जनता के प्रधानमंत्री आपको.....

नमन करती हूँ उस जननी को जिसने दिया भारत माँ को यह मसीहा.....

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