अनु!! तू तो है बहार उस उपवन की,
महकती कुंज वीथियाँ भी तेरी मुस्कान से वहाँ
की,
खुशबू है तू शीत प्रचंड में खिले
पुष्पों की,
गूँज है तू उपवन के तरुणगण गुलदस्ते
की…..
अनु!! तू तो है वह परी,
थामे जिसका भी हाथ नहीं छोड़ती उसका साथ
,
निभाती हर रिश्तो को बखूबी से सबके
साथ, ,
खिल उठती
जिंदगी जब होता तेरा साथ…..
अनु!! तो नाम है उस संगी का,
आँसूओं को नूर में बदल दे वह,
हर विपत्ति में साथ दे वह,
ऐसी कली है वह,
अनु!! तो नाम है उस मधुर संगीत का,
मेंघों-सी धीर ध्वनि है उसकी,
आनंद की प्रभा झलकती मुख पर उसके,
अमृत टपकता नयनों से उसके,
अनु!! तो है वह अनमोल रत्न,
कितनी बार टूटा दिल उसका पनघट पर,
कोशिश की डूबाने की उसकी किश्ती को तट
पर,
हार नहीं मानी उसने,चलती रही लहरों पर...
अनु!! तो है उस उपवन की मल्लिका,
क्या कहूॕ तुझे गुलबहार,छूईमुई या रात की रानी,
लाख कोशिश कर ले पतझर,
तुझे महकाने से रोक न पायेगा कोई.......

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